वरदान

किसी गाँव में एक बुढ़िया रहती थी! वह बहुत ही गरीब थी,और बहुत ज्यादा बीमार रहती थी! लेकिन फिर भी वह सुबह-शाम भगवान् की पूजा किया करती, और निस्वार्थ भाव से उनकी सेवा करती! उसकी इस भक्ति को देखकर भगवान् गणेश बहुत खुश हुए और उस बुढ़िया के सपने में आये उसके सपने में आकर भगवान् गणेश ने कहा की मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूँ! तुम मुझसे कोई भी एक वदान मांग लो!बुढ़िया बोली प्रभु मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे आपके दर्शन हो गए वही मेरे लिए काफी है! तब  भगवान् गणेश बोले अब मैं यहां आया हूँ तो तुम्हे मुझसे कोई न कोई वरदान तो माँगना ही पड़ेगा! यह सुनकर बुढ़िया सोच में पड़ गयी की आखिर वह क्या मांगे! बुढ़िया को दुविधा में देख कर भगवान्  गणेश बोले मैं तुम्हे सोचने के लिए दो दिन का समय देता हूँ !

यदि तुम दो दिन बाद भी कोई वरदान नहीं मांगती तो फिर मैं यहां से ऐसे ही चला जाऊंगा और यह कहकर गणेश भगवान् अंतर्ध्यान  हो गए! उनके जाने के बाद बुढ़िया सोच में पड़ गयी और बहुत सोचने पर भी उसे कुछ समझ नहीं आया की आखिर वह क्या मांगे! तब वह अपने बेटों के पास गयी और उन्हें सबकुछ बताया! यह सुन कर उसके बेटे बोले की आप उनसे बहुत सारी धन-दौलत मांग लो! इससे हमारी सारी गरीबी दूर हो जायेगी और हम जो ये टूटी-फूटी झोपडी में रहते है! धन -दौलत आ जाने से हम इसकी जगह पर एक बढ़िया-सा महल बनवाएंगे और उसमे रहेंगे ! यह सुनकर बुढ़िया अपनी बहुओं के पास गयी और उनसे पूछने लगी!

इस पर उसकी बहुएं बोली माताजी आप उनसे अपने लिए एक पोता मांग लो !उससे हमारे खानदान का नाम आगे बढ़ेगा और आप भी खुश रहोगी! यह सब उपाय सुन कर भी बुढ़िया संतुष्ट नहीं थी! फिर वह अपने पड़ौसियों के पास गयी और उन्हें सब कुछ बताया!यह सब सुनकर उसके पडोसी बोले की आपके बेटों और बहुओं ने जो कहा है आप वह कुछ मत मांगो! आप उनसे अपनी लम्बी उम्र का वरदान मांगो! इससे आप हमेशा अच्छी रहेंगी और आपको कोई तकलीफ भी नहीं होगी!

यह सब सुनकर बुढ़िया अपने घर वापस आ गयी और सोचने लगी की मेरे बेटे और बहुएं भी ठीक कह रहे है और मेरे पडोसी भी! इस तरह तो यह तीन वरदान हुए गणेश जी ने तो सिर्फ एक वरदान देने के लिए ही कहा है!अब मैं उनसे इनमे से कौन-सा वरदान मांगू! यह सोचकर बुढ़िया और भी ज्यादा सोच में पड़ गयी! दो दिन बाद भगवान् गणेश ने उसे फिर दर्शन दिए और बोले की अब तक तो तुमने सोच ही लिया होगा की तुम्हे मुझसे कौन-सा वरदान चाहिए! कुछ देर सोचने के बाद बुढ़िया बोली हाँ भगवन मैंने सोच लिया है!

तब भगवान् बोले की अच्छा है अब तुम मुझसे एक वरदान मांगों! तब बुढ़िया बोली की मैं आपसे यह माँगना चाहती हु की मैं अपने पोते को सोने के पालने में खेलता हुआ देखूं! यह सुनकर भगवान् गणेश आश्चर्य में पड़ गए और बोले की तुमने तो मुझे लूट लिया! मैंने तो तुमसे एक वरदान मांगने के लिए कहा था तुमने तो तीन-तीन वरदान एक ही वरदान में मांग लिए मैं तुम्हारी इस बुद्धिमता से खुश हु और तुम्हे ये वरदान देता हूँ! और भगवान् गणेश उस बुढ़िया को ये वरदान देकर वहां से चले गए !

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