स्वामी विवेकानंद जयंती और राष्ट्रिय युवा दिवस ( 12 जनवरी )

wami Vivekananda Jayanti
Swami Vivekananda Jayanti

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ था ! उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त एवं उनकी माताजी का नाम भुवनेश्वरी देवी था ! उनके पिता पश्चिम बंगाल उच्च न्यायालय के अटॉर्नी जनरल थे तथा उनकी माँ एक गृहिणी थी ! उनके परिजन उन्हें नरेन्, नरेन्द्रनाथ या वीरेश्वर कहकर पुकारते थे ! नरेन्द्रनाथ बचपन में चंचल खोजपरक तथा अपने तर्क प्रस्तुत करने में माहिर थे ! बचपन में उनके घर पर अलग – अलग जाती – धर्म के लोगों का आना – जाना लगा रहता था ! इसलिए घर आने वाले लोगों के लिए घर के बरामदे में हुक्के की अलग – अलग व्यवस्था की जाती ! नरेन् को इस बात को जानने की जिज्ञासा रहती की घर आने वाले मेहमानों के लिए अलग – अलग हुक्के की व्यवस्था क्यों की जाती है, इसलिए एक दिन उन्होंने स्वयं उन सभी हुक्को को बारी – बारी से ग्रहण किया ! लेकिन उन्हें कुछ भी अलग नहीं लगा, सभी एक जैसे ही थे ! तब उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला की सभी मनुष्य बराबर है और जाती का भेद – भाव बेकार !

नरेन्द्रनाथ ने 8 साल की उम्र में ईश्वर चंद्र विद्यासागर मेट्रोपोलिटन इंस्टिट्यूट में प्रवेश लिया, और वहां 1871 से 1877 तक शिक्षा ग्रहण की ! 1879 में प्रेसिडेंसी कॉलेज की एंट्रेंस परीक्षा में फर्स्ट डिवीज़न लाने वाले वह पहले छात्र बने ! उन्होंने 1881 में ललित कला की परीक्षा पास की तथा 1884 में कला स्नातक की डिग्री पूरी की ! नरेंद्र भारतीय संगीत में निपुण थे, वह हमेशा शारीरिक योग, खेल और सभी गतिविधियों में सहभागी रहते थे ! इसीलिए वह शारीरिक बल, मानसिक बल, और आध्यात्मिक बल को एक ही तराज़ू पर रखते थे !

ईश्वर की खोज ने उन्हें रामकृष्ण परमहंस से मिलवाया ! लेकिन उन्होंने जल्दी ही रामकृष्ण परमहंस को अपना गुरु स्वीकार नहीं किया ! वह तो बस उनके चरित्र से प्रभावित होकर  अपने दो दोस्तों के साथ दक्षिणेश्वर गए और वहां  रामकृष्ण परमहंस से मिले ! वह ब्रह्म समाज के सदस्य के रूप में उस वक़्त मूर्ती पूजा और रामकृष्ण परमहंस की काली देवी की पूजा के विरूद्ध थे ! नरेंद्र के पिता की अचानक मृत्यु हो गयी, और उनका परिवाई दिवालिया हो गया ! वह अपने परिवार के लिए कुछ अच्छा करना चाहते थे ! इसलिए वह कोई काम ढ़ूढ़ने में लग गए ! बहुत प्रयास करने पर भी उन्हें सफलता नहीं मिली ! उस वक़्त भगवान् के अस्तित्व का प्रश्न उनके सामने खड़ा हुआ, तब रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें तसल्ली दी !

उनके परिवार की आर्थिक भलाई के लिए परमहंस ने उनसे काली माता से प्रार्थना करने को कहा ! उनकी सलाह मानकर वह काली माता के मंदिर गए ! वहां जाकर उन्होंने खुद को सच्चाई पर चलने तथा लोगों की भलाई करने की प्रार्थना की, न की जिसकी उन्हें जरूरत थी ! उस वक़्त उन्हें भगवान् की अनुभूति हुई, और उन्होंने परमहंस को उसी वक़्त अपना गुरु मान लिया ! नरेंद्र और उनके अन्य शिष्यों ने रामकृष्ण परम हंस से भगवा पोशाक लिया, और एक तपस्वी की तरह उनकी हर आज्ञा का पालन किया ! रामकृष्ण परमहंस ने ही उन्हें सिखाया की मनुष्य की सेवा करना ही भगवान् की सबसे बड़ी पूजा है !

मिशिगन विश्वविद्यालय में पत्रकारों के समूह से स्वामी विवेकानंद ने कहा था की यह सदी आपकी है, लेकिन 21 वी सदी भारत की होगी ! 1893 में शिकागो ( अमेरिका ) की धर्म संसद में ऐतिहासिक भाषण में कहा था, की मुझे अपने धर्म पर गर्व है जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकार्यता की शिक्षा दी ! हम न केवल सार्वभौमिक सहिष्णुता में विश्वास करते है, बल्कि सभी धर्मों को मूल रूप से स्वीकार करते है ! मुझे अपने देश पर भी गर्व है ! उस भाषण के बाद सभागार में देर तक तालियों की आवाज़ गूंजती रही, जबकि उन्हें बोलने के लिए कुछ ही मिनट दिए गए थे !

शायद बहुत ही कम लोग ये जानते होंगे की शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मलेन में भाग लेने के लिए वह कुछ हफ़्तों पहले पहुंच गए थे ! उस वक़्त अमेरिका की ठंड सहन करने के लिए उनके पास न तो पर्याप्त कपड़े थे और न ही यथा –  योग्य रहने लायक पैसे ! उन दिनों उन्होंने शिकागो में न केवल भिक्षा मांग कर भोजन जुटाया, बल्कि यार्ड में खड़ी मालगाड़ी में रात भी बितायी ! युग – पुरुष अपने ऐसे ही कार्यों और आचरण से उदाहरण बनते है ! उनके कार्यों और विचारों से प्रवाभित होकर एक विदेशी महिला ने उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा ! उस विदेशी महिला ने उनसे कहा की उसकी इच्छा विवेकानंद जैसा ही तेजस्वी, विद्यमान और गौरवशाली पुत्र पाने की है ! और यह तभी संभव हो पायेगा जब उसका विवाह उनके साथ हो जाए ! तब उसकी बात सुनकर विवेकानंद ने बहुत ही सहजता से कहा की मै आज से ही आपका पुत्र बन जाता हूं ! इस तरह आपकी इच्छा अपने आप पूरी हो जायेगी !

4 जुलाई 1902 को मात्र 39 वर्ष की युवा आयु में उनका देहांत हो गया ! बेलूर की गंगा नदी में उनके शव को चन्दन की लकड़ियों से अग्नि दी गयी ! 1984 में भारत सरकार ने उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाना तय किया जो तब से हर साल मनाया जाता है !

स्वामी विवेकानंद के विचार :-

उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक की लक्ष्य प्राप्त न हो जाए !

खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है !

अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो उसका कुछ मूल्य है! अन्यथा ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है !इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाए उतना बेहतर है !

जब तक आप खुद पे विशवास नहीं करते तब तक आप भगवान् पर विशवास नहीं कर सकते !

विश्व एक व्यायामशाला है जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते है !

एक विचार लो, उसे अपना जीवन बना लो ! उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो, उस विचार को जियो ! अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी विचारों को किनारे रख दो ! यही सफल होने का तरीका है !

दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो !

किसी दिन जब आपके सामने कोई समस्या न आये तब आप सुनिश्चित हो सकते है की आप गलत मार्ग पर चल रहे है !

सच्ची सफलता और आनंद का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि वह स्त्री या पुरुष जो बदले में कुछ नहीं मांगता, पूर्ण रूप से निःस्वार्थ व्यक्ति ही सबसे सफल है !

एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो, और बाकी सब भूल जाओ !

जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे, यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो, तो तुम कमजोर हो जाओगे ! अगर खुद को ताकतवर सोचते हो, तो तुम ताकतवर हो जाओगे !

 

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